कानून बन तो जाते हैं, लेकिन क्या सच में कानूनी कायदों पर अमल होता है? जिस मकसद से कानून बनाए जाते हैं क्या वो मकसद पूरे हो भी रहे हैं? एक क़ानून जो हमारी बेटियों बच्चों और बच्चियों को वहशी दरिन्दों से बचाने के लिए बनाया गया वही क़ानून आज पीड़ितों का सिरदर्द बना हुआ है. POCSO एक्ट, 2012 यानी प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन फ़्रॉम सेक्शुअल ऑफ़ेंसेज़. हिन्दी में कहें तो लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012. पॉक्सो कानून के तहत मुकदमे का फ़ैसला चार्ज शीट फाइल होने के एक साल पूरा होने तक आ जाना चाहिए. जून 2012 में लागू किए गए पाक्सो एक्ट के नियम भी बहुत कड़े बनाए गए, लेकिन उसका पालन सही तरीके से नहीं हुआ. या यूं कहे हमारे सड़ चुके सिस्टम की वज़ह से पाक्सो एक्ट फेल हो गया. इसीलिए आज ये कड़ा कानून भी पीड़ितों इंसाफ़ की राह आसान नहीं कर पाया है. विडियो देखें.from Latest News देश News18 हिंदी https://ift.tt/2xWMRCa

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